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LLB प्रथम सेमेस्टर: मानव अधिकार विधि – परीक्षा सफलता गाइड एवं सम्पूर्ण विश्लेषण

LLB प्रथम सेमेस्टर: मानव अधिकार विधि – परीक्षा सफलता गाइड एवं सम्पूर्ण विश्लेषण

Pramod Pramod

मानव अधिकार विधि केवल विधिक संहिताओं का संकलन मात्र नहीं है, अपितु यह 'मानवीय गरिमा' (Human Dignity) को सुरक्षित करने वाला एक वैश्विक विधिक दर्शन है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) की एल.एल.बी. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के परिप्रेक्ष्य में, यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि विधि का मूल उद्देश्य न्याय की स्थापना करना है, और न्याय का केंद्र बिंदु मानव है। एक परीक्षा रणनीतिकार के रूप में, मेरा परामर्श है कि आप इस विषय को केवल सूचनात्मक न मानकर विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझें। जब आप यह समझते हैं कि मानव गरिमा ही विधि का केंद्र है, तो आपके उत्तर स्वतः ही उत्कृष्ट श्रेणी में आ जाते हैं। यह मार्गदर्शिका आपको ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर आधुनिक न्यायिक सक्रियता तक के उन बिन्दुओं से अवगत कराएगी जो परीक्षा में अधिकतम अंक अर्जित करने के लिए अनिवार्य हैं।

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म.प्र. भू-राजस्व प्रशासन एवं किरायेदार संरक्षण : भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा स्थान नियंत्रण अधिनियम, 1961 का अध्ययन

म.प्र. भू-राजस्व प्रशासन एवं किरायेदार संरक्षण : भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा स्थान नियंत्रण अधिनियम, 1961 का अध्ययन

Pramod Pramod

**Assignment शीर्षक:** राजस्व प्रशासन का पदसोपान, भूमिस्वामी के अधिकार, नामांतरण एवं किरायेदार की बेदखली — एक विश्लेषणात्मक अध्ययन मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 ने राज्य में प्रचलित जमींदारी-मालगुजारी की भिन्न-भिन्न काश्त-व्यवस्थाओं को समाप्त कर एक एकीकृत भू-प्रशासन ढाँचा स्थापित किया। इसकी आधारशिला है धारा 57 का सिद्धांत —

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म.प्र. भू-राजस्व प्रशासन एवं किरायेदार संरक्षण : भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा स्थान नियंत्रण अधिनियम, 1961 का अध्ययन

म.प्र. भू-राजस्व प्रशासन एवं किरायेदार संरक्षण : भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा स्थान नियंत्रण अधिनियम, 1961 का अध्ययन

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**Assignment शीर्षक:** राजस्व प्रशासन का पदसोपान, भूमिस्वामी के अधिकार, नामांतरण एवं किरायेदार की बेदखली — एक विश्लेषणात्मक अध्ययन मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 ने राज्य में प्रचलित जमींदारी-मालगुजारी की भिन्न-भिन्न काश्त-व्यवस्थाओं को समाप्त कर एक एकीकृत भू-प्रशासन ढाँचा स्थापित किया। इसकी आधारशिला है धारा 57 का सिद्धांत —

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मानव-वध, हत्या, उपहति, व्यपहरण, संपत्ति के विरुद्ध अपराध एवं मानहानि — BNS 2023 के परिप्रेक्ष्य में

मानव-वध, हत्या, उपहति, व्यपहरण, संपत्ति के विरुद्ध अपराध एवं मानहानि — BNS 2023 के परिप्रेक्ष्य में

Pramod Pramod

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 को प्रतिस्थापित कर **भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023** दिनांक 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुई। परीक्षा हेतु ध्यातव्य है कि 2025 से इस प्रश्न-पत्र के उत्तर पुरानी IPC धाराओं से नहीं, अपितु BNS की नई धाराओं से लिखे जाने चाहिए। शरीर के विरुद्ध अपराधों (मानव वध, हत्या, उपहति, व्यपहरण) से लेकर संपत्ति के विरुद्ध अपराधों (चोरी से डकैती तक की क्रमिक शृंखला) और अंततः प्रतिष्ठा के विरुद्ध अपराध (मानहानि) तक का क्रमबद्ध, केस-आधारित अध्ययन प्रस्तुत है।

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Constitutional Law of India-II (अनुच्छेद 245–395)

Constitutional Law of India-II (अनुच्छेद 245–395)

Pramod Pramod

भारतीय संविधान का **भाग XI, अध्याय I (Art. 245–255)** संघ (Union) और राज्यों (States) के बीच **विधायी शक्तियों (legislative powers)** का बँटवारा करता है। यह वितरण दो आधारों पर होता है — **क्षेत्रीय (territorial)** और **विषयगत (subject-matter)**।

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अपकृत्य विधि एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Law of Torts & CPA 2019)

अपकृत्य विधि एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Law of Torts & CPA 2019)

Pramod Pramod

**Q.1.** "स्वयं किसी कृत्य से दोष की उत्पत्ति नहीं होती, बल्कि कृत्य के साथ दोषी चित्त का होना भी आवश्यक है" इस सूक्ति के परिप्रेक्ष्य में मानसिक तत्वों की समीक्षा कीजिए। *(Explain the mental elements of torts with reference to the maxim "Actus non facit reum nisi mens sit rea".)* ​ **Q.2.** "अपवचन" कब स्वतः वाद-योग्य होते हैं? *(When is slander actionable per se?)* ​ **Q.3.** निम्न चार की समीक्षा कीजिए — (1) विद्वेषपूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) (2) मिथ्या बंदीकरण (False Imprisonment) (3) हमला (Assault) (4) प्रहार (Battery) ​ **Q.4.** उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए। *(Describe the salient features of the Consumer Protection Act, 2019.)* ​ **Q.5.** रायलैंड्स विरुद्ध फ्लेचर, LR 1 Ex. 456 के वाद के तथ्यों एवं सिद्धांतों की विवेचना कीजिए। *(Discuss the facts and principles of law laid down in the case of Rylands v. Fletcher, LR 1 Ex. 456.)*

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अपकृत्य विधि एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Law of Torts & CPA 2019)

अपकृत्य विधि एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Law of Torts & CPA 2019)

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**Q.1.** "स्वयं किसी कृत्य से दोष की उत्पत्ति नहीं होती, बल्कि कृत्य के साथ दोषी चित्त का होना भी आवश्यक है" इस सूक्ति के परिप्रेक्ष्य में मानसिक तत्वों की समीक्षा कीजिए। *(Explain the mental elements of torts with reference to the maxim "Actus non facit reum nisi mens sit rea".)* ​ **Q.2.** "अपवचन" कब स्वतः वाद-योग्य होते हैं? *(When is slander actionable per se?)* ​ **Q.3.** निम्न चार की समीक्षा कीजिए — (1) विद्वेषपूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) (2) मिथ्या बंदीकरण (False Imprisonment) (3) हमला (Assault) (4) प्रहार (Battery) ​ **Q.4.** उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए। *(Describe the salient features of the Consumer Protection Act, 2019.)* ​ **Q.5.** रायलैंड्स विरुद्ध फ्लेचर, LR 1 Ex. 456 के वाद के तथ्यों एवं सिद्धांतों की विवेचना कीजिए। *(Discuss the facts and principles of law laid down in the case of Rylands v. Fletcher, LR 1 Ex. 456.)*

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